Wed, 19/02/2020

11:35am

astrology services in india

kundli analysis, astrology services in india

Vaastu & Astrology Services at your Door-Step

Shri Ram Ji Ki Aarti

shree-ram-g-aarti

Shri Ramayan ji ki Aarti in Hindi | श्री रामायण जी की आरती


आरती श्री रामायण जी की
कीरत कलित ललित सिय पिय की।

गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद
बाल्मीक विज्ञानी विशारद।
शुक सनकादि शेष अरु सारद
वरनि पवन सुत कीरति निकी।।
आरती श्री रामायण जी की ..

संतन गावत शम्भु भवानी
असु घट सम्भव मुनि विज्ञानी।
व्यास आदि कवि पुंज बखानी
काकभूसुंडि गरुड़ के हिय की।।
आरती श्री रामायण जी की ….

चारों वेद पूरान अष्टदस
छहों होण शास्त्र सब ग्रंथन को रस।
तन मन धन संतन को सर्वस
सारा अंश सम्मत सब ही की।।
आरती श्री रामायण जी की …

कलिमल हरनि विषय रस फीकी
सुभग सिंगार मुक्ती जुवती की।
हरनि रोग भव भूरी अमी की
तात मात सब विधि तुलसी की ।।
आरती श्री रामायण जी की ….

Online Advice

  • Astrologers
  • Tarot Readers
  • Numerologists
  • Vaastu Experts
  • Fengshui Experts
  • Horoscope 2019

Contact Us

Copyright © 2019, nastrology. All Rights Reserved

Shri Tulsi Mata ki Aarti in Hindi | श्री तुलसी माता की आरती

ऊँ जय तुलसी माता मैया जय तुलसी माता।
सब सुख की दाता वर माता ।।
ऊँ जय तुलसी माता।

सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर,
रज से रक्षा करके भव त्राता।।
ऊँ जय तुलसी माता ।

बहु पुत्री है श्यामा, सूर वल्ली है ग्राम्या,
विष्णु प्रिय जो तुमको सेवे सो नर तर जाता।
ऊँ जय तुलसी माता ।

हरि के शीश विराजत त्रिभुवन से हो वंदित,
पतित जनों की तारिणि तुम हो विख्याता।
ऊँ जय तुलसी माता ।

लेकर जन्म बिजन में, आई दिव्य भवन में,
मानव लोक तुम्हीं से सुख संपति पाता।
ऊँ जय तुलसी माता ।

हरि को तुम अति प्यारी श्याम वर्ण सुकुमारी,
प्रेम अजब है श्री हरि का तुम से नाता।
ऊँ जय तुलसी माता ।

Shri Satyanarayan Bhagwan Ki Aarti in Hindi | श्री सत्यनारायण भगवान की आरती

जय श्री लक्ष्मी रमणा जय श्री लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी जन पातक हरणा।।
ऊँ जय…

रत्न जडित सिंहासन अद्भूत छवि राजै ।
नारद करत निरंतर घण्टा ध्वनि बाजै ।।
ऊँ जय…

प्रकट भए कलि कारण द्विज को दरश दियो ।
बूढ़ा ब्राह्मण बन के कंचन महल कियो।।
ऊँ जय…

दुर्बल भील कराल जिन पर कृपा करी।
चंद्रचूड़ इक राजा तिनकी विपत हरी।।
ऊँ जय….

वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दीनी।
सो फल भोग्यो प्रभु जी फिर स्तुति कीन्ही।।
ऊँ जय….

भाव भक्ति के कारण छिन-छिन रूप धरयो।
श्रद्धा धारण कीनी जन को काज सरयो।।
ऊँ जय….

ग्वाल बाल संग राजा बन में भक्ति करी।
मनवांछित फल दीन्हों दीनदयाल हरी । ।
ऊँ जय….

चढ़त प्रसाद सवाया कदली फल मेवा।
धूप दीप तुलसी से राजी सत्य देवा।।
ऊँ जय….

श्री सत्यनारायण जी की आरती जो कोई गावे।
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावै।।
ऊँ जय….

Shri Saraswati ji Ki Aarti in Hindi | श्री सरस्वती देवी की आरती

ऊँ जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता।।
ऊँ जय सरस्वती माता।

चन्द्रवदीन पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी।।
ऊँ जय सरस्वती माता।

बाएँ कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गले मोतियन माला।।
ऊँ जय सरस्वती माता।

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठि मंथरा दासी, रावण संहार किया।।
ऊँ जय सरस्वती माता।

विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह, अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो।।
ऊँ जय सरस्वती माता।

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्दर करो।।
ऊँ जय सरस्वती माता।

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे ।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे।।
ऊँ जय सरस्वती माता।

Bhagwan Shiv ki Aarti in Hindi | भगवान शिव की आरती

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं ।
सदा वसन्तं ह्रदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि।।
ऊँ जय शिव ओंकारा स्वामी हर शिव ओंकारा।
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांर्गी धारा।।
ऊँ जय शिव ओंकारा……

एकानन चतुरानन पंचांनन राजे।
हंसासंन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे।।
ऊँ जय शिव ओंकारा……
दो भुज चार चतुर्भज दस भुज अति सोहे।
तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहे।।
ऊँ जय शिव ओंकारा……

अक्षमाला, बनमाला, रुंडमालाधारी।
चंदन मृदमग सोहे, भोले शशिधारी।।
ऊँ जय शिव ओंकारा……

श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघाम्बर अंगे।
सनकादिक, ब्रह्मादिक, भूतादिक संगे।
ऊँ जय शिव ओंकारा……

कर मध्ये सुकमंडलु चक्र, त्रिशूल धरता।
जगकरता, जगभरता, जगसंहारकरता ।।
ऊँ जय शिव ओंकारा……

ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रवणाक्षर मध्ये ये तीनों एका।।
ऊँ जय शिव ओंकारा……

काशी में विश्वनाथ विराजत नंदी ब्रह्मचारी
नित उठी भोग लगावत महिमा अति भारी।।
ऊँ जय शिव ओंकारा……

त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे।।
ऊँ जय शिव ओंकारा…..

जय शिव ओंकारा, स्वामी हर शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अद्धांर्गी धारा।
ऊँ जय शिव ओंकारा……

Shri Ganesh ki Aarti in Hindi | भगवान श्रीगणेश की आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।
जय गणेश देवा।

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
मस्तक सिंदूर सोहे मुसे की सवारी।।
जय गणेश देवा।

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डूअन का भोग लागे संत करे सेवा।।
जय गणेश देवा।

अंधन को आंख देत कोढिन को काया
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया।।
जय गणेश देवा।

हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
सूरश्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।।
जय गणेश देवा।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।
जय गणेश देवा।

विघ्नहरण मंगलकरण, काटन सकल क्लेश।
सबसे पहले सुमरिए गौरी-पुत्र गणेश।।
जय गणेश देवा।

Shri Ganga Mata Ki Aarti in Hindi | श्री गंगा माता की आरती

ऊँ जय गंगे माता, श्री गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्यावत, मनवंछित फल पाता।।
ऊँ जय गंगे माता।

चन्द्र सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ।।
ऊँ जय गंगे माता।

पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता ।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता।।
ऊँ जय गंगे माता।

एक ही बार भी जो नर तेरी शरणगति आता ।
यम की त्रास मिटा कर, परम गति पाता।।
ऊँ जय गंगे माता।

आरती मात तुम्हारी जो जन नित्य गाता।
दास वही जो सहज में मुक्ति को पाता।।
ऊँ जय गंगे माता।

Shri Surya Dev ki Aarti in Hindi | श्री सूर्यदेव की आरती

जय कश्यप नन्दन, ऊँ जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
ऊँ जय कश्यप नन्दन।

जय सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दुखहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
ऊँ जय कश्यप नन्दन।

जय सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
ऊँ जय कश्यप नन्दन।

जय सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
ऊँ जय कश्यप नन्दन।

जय कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
ऊँ जय कश्यप नन्दन।

जय नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
ऊँ जय कश्यप नन्दन।

जय सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥
ऊँ जय कश्यप नन्दन।

Shri Laxmi Mata Ki Aarti in Hindi | श्री लक्ष्मी माता की आरती

ऊँ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।।
ऊँ जय लक्ष्मी माता।

ब्रह्माणी रूद्राणी कमला, तुम ही जगमाता।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।।
ऊँ जय लक्ष्मी माता।

दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि पाता।।
ऊँ जय लक्ष्मी माता।

तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशक, भवनिधि से त्राता।।
ऊँ जय लक्ष्मी माता।

जिस घर में तुम रहती सब सद्गुण आता।
सब सुंदर हो जाता, मन नहीं घबराता।।
ऊँ जय लक्ष्मी माता।

Shri Hanuman ji Ki Aarti in Hindi | श्री हनुमानजी की आरती

आरति कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपै ।
रोग-दोष जाके निकट न झांपै ।।

अंजनी पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रेम सदा सहाई ।।
दे बीरा रघुनाथ पठाये ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ।।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई।।
लंका जारि असुर संहारे।
सिया रामजी के काज संवारे ।।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे ।
आनि सजीवन प्रान उबारे ।।
पैठि पताल तोरि जम-कारे ।
अहिरावन की भुजा उखारे ।।

बाईं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संत जन तारे ।।
सुर नर मुनि आरती उतारे ।
जै जै जै हनुमान उचारे ।।

कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ।।
जो हनुमान जी की आरती गावै ।
बसि बैकुंठ परम पद पावै ।।

लंक विध्वंस किये रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ।।
आरति कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ।।

Shrimad bhagwat geeta ki Aarti in Hindi | श्रीमद्भागवत गीता आरती

करो आरती श्रीमद्भागवत गीता की।
कर्म प्रकाशिनि ज्ञान प्रदायिनी की ।।

जग की तारन हार त्रिवेणी,
स्वर्गधाम की सुगम नसेनी।
अपरम्पार शक्ति की देनी,
जय हो सदा पुनीता की।।
करो आरती श्री मद्भागवत गीता की।
कर्म प्रकाशिनि ज्ञान प्रदायिनी की ।।

ज्ञानदीन की दिव्य-ज्योती मां,
सकल जगत की तुम विभूती मां।
महा निशातीत प्रभा पूर्णिमा,
प्रबल शक्ति भय भीता की।।
करो आरती श्री मद्भागवत गीता की।
कर्म प्रकाशिनि ज्ञान प्रदायिनी की ।।

अर्जुन की तुम सदा दुलारी,
सखा कृष्ण की प्राण प्यारी ।
षोडश कला पूर्ण विस्तारी,
छाया नम्र विनीता की।।
करो आरती श्री मद्भागवत गीता की।
कर्म प्रकाशिनि ज्ञान प्रदायिनी की ।।

श्याम का हित करने वाली,
मन का सब मल हरने वाली।
नव उमंग नित भरने वाली,
परम प्रेरिका कान्हा की ।।
करो आरती श्री मद्भागवत गीता की।
कर्म प्रकाशिनि ज्ञान प्रदायिनी की ।।

Shri Yamuna Mata Ki Aarti in Hindi | श्री यमुना माता की आरती

ऊँ जय यमुना माता, मैया जय यमुना माता
जो नहावे फल पावे सुख समृद्धि दाता।।
ऊँ जय यमुना माता।

पावन श्री यमुना जल शीतल अगम बहै धारा,
जो जन शरण से कर दिया निस्तारा।।
ऊँ जय यमुना माता।

जो जन प्रातः ही उठकर नित्य स्नान करे,
यम के त्रास न पावे जो नित्य ध्यान करे।।
ऊँ जय यमुना माता।

कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही,
तुम्हारा बड़ा महातम चारों वेद कही।।
ऊँ जय यमुना माता।

आन तुम्हारे माता प्रभु अवतार लियो,
नित्य निर्मल जल पीकर कंस को मार दियो।।
ऊँ जय यमुना माता।

नमो मात भय हरणी शुभ मंगल करणी,
मन बेचैन भय है तुम बिन वैतरणी।।
ऊँ जय यमुना माता

Shri Durga Mata ki Aarti in Hindi | श्री दुर्गा माता की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशि दिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
जय अम्बे …

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको ।।
जय अम्बे …

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै।।
जय अम्बे …

केहरि वाहन राजत, खड़ग खप्पर धारी।
सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी।।
जय अम्बे …

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटि चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति।।
जय अम्बे …

शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।।
जय अम्बे …

चण्ड – मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे।
मधु – कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
जय अम्बे …

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।।
जय अम्बे …

चैंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरु।
बाजत ताल मृदंग, अरु बाजत डमरू।।
जय अम्बे …

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता ।।
जय अम्बे …

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी।।
जय अम्बे …

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति ।।
जय अम्बे …

अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख – सम्पत्ति पावे।।
जय अम्बे …

Kaal Bhairav ki Aarti in Hindi | श्री भैरव की आरती

जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा।
जय काली और गौरा कृतसेवा।।

तुम पापी उद्धारक दुख सिन्धु तारक।
भक्तों के सुखकारक भीषण वपु धारक।।

वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी।।

तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे।
चतुर्वतिका दीपक दर्शन दुःख खोवे।।

तेल चटकी दधि मिश्रित माषवली तेरी।
कृपा कीजिये भैरव करिये नहीं देरी।।

पैरों घुंघरू बाजत डमरू डमकावत।
बटुकनाथ बन बालक जन मन हरषवत ।।

बटुकनाथ की आरती जो कोई जन गावे ।
कहे धरणीधर वह नर मन वांछित फल पावे।।

Mata Parvati Ki Aarti in Hindi | माता पार्वती की आरती

जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता।
ऊँ जय पार्वती माता।

अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।
ऊँ जय पार्वती माता।

सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।
ऊँ जय पार्वती माता।

सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
ऊँ जय पार्वती माता।

शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।
ऊँ जय पार्वती माता।

श्रष्टिरूप तुम्हीं जननी शिव संग रंगराता
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
ऊँ जय पार्वती माता।

देवन अरज करत हम चित को लाता
गावत दे दे ताली मन में रंगराता।
ऊँ जय पार्वती माता।

श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
ऊँ जय पार्वती माता।

Shri Laddu Gopal ki Aarti in Hindi | भगवान बालकृष्ण की आरती

आरती बालकृष्ण की कीजे ।
अपना जनम सफल करि लीजे ।।
श्री यशोदा का परम दुलारा ।
बाबा की अखियन का तारा ।।
गोपिन के प्राणन का प्यारा ।
इन पर प्राण निछावर कीजे ।।
आरती बालकृष्ण की कीजे ।

बलदाऊ का छोटा भैया।
कान्हा कहि कहि बोलत मैया ।।
परम मुदित मन लेत वलैया ।
यह छबि नैनन में भरि लीजे ।।
आरती बालकृष्ण की कीजे ।

श्री राधावर सुघर कन्हैया।
ब्रज जन का नवनीत खवैया।।
देखत ही मन नयन चुरैया ।
अपना सरबस इनको दीजे।।
आरती बालकृष्ण की कीजे।

तोतरि बोलनि मधुर सुहावे ।
सखन मधुर खेलत सुख पावे ।।
सोई सुकृति जो इनको ध्यावे।
अब इनको अपनो करि लीजे।।
आरती बालकृष्ण की कीजे ।

Shri Sai Baba ki Aarti in Hindi | श्री साईं बाबा की आरती

आरती श्री साईं सुरवर की।
परमानन्द सदा सुरवर की ।।

जा की कृपा विपुल सुखकारी।
दुख, शोक, संकट, भयहारी।।

शिरडी में अवतार रचाया।
चमत्कार से तत्व दिखाया।।

कितने भक्त चरण पर आए।
वे सुख शान्ति चिरंतन पाए।।

भाव धरै जो मन में जैसा।
पावत अनुभव वो ही वैसा।।

गुरु की उदी लगावे तन को।
समाधान लाभत उस मन को।।

साईं नाम सदा जो गावे।
सो फल जग में शाश्वत पावे।।

गुरुवासर करि पूजा और सेवा।
उस पर कृपा करत गुरुदेवा ।।

राम, कृष्ण, हनुमान रूप में।
दे दर्शन, जानत जो मन में।।

विविध धर्म के सेवक आते।
दर्शन कर इच्छित फल पाते।।

Shri Krishna ji ki Aarti in Hindi | भगवान श्रीकृष्ण की आरती

जय श्रीकृष्ण हरे, प्रभु जय श्रीकृष्ण हरे।
भक्तजनन के दुख्र सारे पल में दूर करे।

परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी।
जय रस रास बिहारी जय जय गिरधारी।

कर कंकन कटि सोहत कानन में बाला।
मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला।

दीन सुदामा तारे दरिद्रों के दुख टारे।
गज के फंद छुड़ाए भवसागर तारे।

हिरण्यकश्यप संहारे नरहरि रुप धरे।
पाहन से प्रभु प्रगटे जम के बीच परे।

केशी कंस विदारे नल कूबर तारे।
दामोदर छवि सुंदर भगतन के प्यारे।

काली नाग नथैया नटवर छवि सोहे।
फन-फन नाचा करते नागन मन मोहे।

राज्य उग्रसेन पायो माता शोक हरे।
द्रुपद सुता पत राखी करुणा लाज भरे।

Shri Radha ji Ki Aarti in Hindi | श्रीराधा की आरती

आरती श्री वृषभानुसुता की,
मंजु मूर्ति मोहन ममता की।।
त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,
विमल विवेक विराग विकासिनि।
पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि,
सुन्दरतम छवि सुन्दरता की।।
आरती श्री वृषभानुसुता की।

मुनि मन मोहन मोहन मोहनि,
मधुर मनोहर मूरती सोहनि।
अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि,
प्रिय अति सदा सखी ललिता की।।
आरती श्री वृषभानुसुता की।

संतत सेव्य सत मुनि जनकी,
आकर अमित दिव्यगुन गनकी।
आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी,
अति अमूल्य सम्पति समता की।।
आरती श्री वृषभानुसुता की।

कृष्णात्मिका, कृषण सहचारिणि,
चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि।
जगज्जननि जग दुखनिवारिणि,
आदि अनादिशक्ति विभुता की।।
आरती श्री वृषभानुसुता की।

Brihaspati Dev ji ki Aarti in Hindi | देवगुरु बृहस्पति की आरती

जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।
छिन छिन भोग लगाऊ फल मेवा।।
जय बृहस्पति देवा।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
जगत पिता जगदीश्वर तुम सबके स्वामी।।
जय बृहस्पति देवा।

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, किरपा करो भर्ता।।
जय बृहस्पति देवा।

तन, मन, धन अर्पणकर जो शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।।
जय बृहस्पति देवा।

दीन दयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सभ हर्ता, भाव बंधन हारी।।
जय बृहस्पति देवा।

सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाओ संतन सुखकारी।।
जय बृहस्पति देवा।

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
जेष्टानंद बन्द सो सो निश्चय पावे ।।
जय बृहस्पति देवा।

Sheetla mata ki Aarti in hindi | शीतला माता की आरती

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,
आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता।।
ऊँ जय शीतला माता।

रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता।
ऋद्धिसिद्धि चंवर डोलावें, जगमग छवि छाता।।
ऊँ जय शीतला माता।

विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता।
वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता।।
ऊँ जय शीतला माता।

इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा।
सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता।।
ऊँ जय शीतला माता।

घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता।
करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता।।
ऊँ जय शीतला माता।

ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,
भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता।।
ऊँ जय शीतला माता।

जो भी ध्यान लगावैं प्रेम भक्ति लाता।
सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता।।
ऊँ जय शीतला माता।

रोगन से जो पीडित कोई शरण तेरी आता।
कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता।।
ऊँ जय शीतला माता।
बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता।
ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछिताता।।
ऊँ जय शीतला माता।

शीतल करती जननी तुही है जग त्राता।
उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता।।
ऊँ जय शीतला माता।

दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता ।
भक्ति आपनी दीजै और न कुछ भाता।।
ऊँ जय शीतला माता।

Gaytri Mata Ki Aarti in Hindi | गायत्री माता की आरती

जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जगपालक कत्री।
दुख शोक, भय, क्लेश दारिद्र दैन्य हत्री।।
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

ब्रह्म रूपिणी, प्रणात पालिन जगत धातृ अम्बे।
भव भयहारी, जन-हितकारी, सुखदा जगदम्बे।।
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

भय हारिणी, भवतारिणी, अनघेअज आनन्द राशि।
अविकारी, अखहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी।।
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

कामधेनु सतचित आनन्द जय गंगा गीता।
सविता की शाश्वती, शक्ति तुम सावित्री सीता।।
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

ऋग, यजु साम, अथर्व प्रणयनी, प्रणव महामहिमे।
कुण्डलिनी सहस्त्र सुषुमन शोभा गुण गरिमे।।
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

स्वाहा, स्वधा, शची ब्रह्माणी राधा रुद्राणी।
जय सतरूपा, वाणी, विद्या, कमला कल्याणी।।
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

जननी हम हैं दीन-हीन, दुरूख-दरिद्र के घेरे।
यदपि कुटिल, कपटी कपूत तउ बालक हैं तेरे।।
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

स्नेहसनी करुणामय माता चरण शरण दीजै।
विलख रहे हम शिशु सुत तेरे दया दृष्टि कीजै।।
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

काम, क्रोध, मद, लोभ, दम्भ, दुर्भाव द्वेष हरिये।
शुद्ध बुद्धि निष्पाप हृदय मन को पवित्र करिये।।
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

तुम समर्थ सब भांति तारिणी तुष्टि-पुष्टि दाता।
सत मार्ग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता।।
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।

Mata vaishno devi ki Aarti in Hindi | वैष्णो माता की आरती

जय वैष्णव माता, मैया जय वैष्णव माता।
द्वार तुम्हारे जो भी आता, बिन माँगे सब कुछ पा जाता।।
ऊँ जय वैष्णो माता।

तू चाहे तो जीवन दे दे, चाहे पल मे खुशियां दे दे।
जन्म मरण हाथ तेरे है शक्ति माता ।।
ऊँ जय वैष्णो माता।

जब जब जिसने तुझको पुकारा तूने दिया है बढ़ के सहारा
भोले राही को मैया तेरा प्यार ही राह दिखाता।।
ऊँ जय वैष्णो माता।

हर साल सहगल आता और तेरे गुण गाता।
ऊँ जय वैष्णव माता, मैया जय वैष्णव माता।।

asdasd
X